बुवाई के तरीके (Sowing methods)

बुवाई के तरीके (Sowing methods)

आज हम जानेगे की बुवाई क्या है और कितने प्रकार से हम बुवाई कर सकते है

बुवाई वह प्रक्रिया जिसके द्वारा हम बीज को मिट्टी में एक निश्चित गेहेराई तक रखते है जिससे उसका अंकुरण अच्छा हो सके बुवाई का कृषि में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है

अगर आप बीज को सिमित गेहेराई तक रखेगे तो बीज का अंकुरण अच्छा होगा बीज को बोते समय हमे कुछ बाते हमें ध्यान में रखनी चाहिए बीज को बोते समय बीज की गेहेराई, बीज की मात्रा तथा बीज से बीज की निश्चित दुरी पर ध्यान रखना चाहिए

बुवाई के तरीके

बुवाई करने के कई तरीक़े है यह फसल पर निर्भर करता है की आप कोनसी फसल चुनते है प्र्तेक फसल को बोन का निश्चित तरीका होता है
आज हम जानेगे की बीजो की बुवाई किस तरहे से की जाती है

1)Broadcasting(प्रसारण)
2)Dibbling
3)Drilling
4)Seed dropping behind the plough(हल के पीछे बीज गिरना)
5)transplanting of seedling
6)hill placement
7)check row planting(पंक्ति रोपण )

1)बीज की बुवाई का brodcasting विधि :

यह सबसे अच्छा और आसान तरीका होता है इस विधि में समय की वचत होती है इस विधि में हाथो द्वारा बीज को बिखेर कर बोया जाता है इस विधि अपनाते समय यह कुछ बातो को ध्यान में रखना चाहिए  जो किसान इस विधि को अपनाता है उसे इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए और उसके पास इस विधि से बीज बोन का अनुभव होना चाहिए इस विधि में बीज की मात्रा अधिक होनी चाहिए इस विधि को हम मशीन के द्वारा भी कर सकते है मशीन के द्वारा करने से बीज की मात्रा काम लगती है

2)बीज बुवाई की Dibbling विधि से

यह बहुत साधारण और और पुरानी विधि है यह विधि चना, गेहू ,
जौ, आदि बीजो को बोन में इस विधि का प्रयोग किया जाता है इस विधि में डिबलर यंत्र के द्वारा मिट्टी में छोटा सा गड़ा करके बीज को उसमें रख दिया जाता है और उसको ढक दिया जाता है इस यंत्र को अनुभवी किसान और अनुभवी लेवर के द्वारा चलाया जाता है
3)Drilling विधि
ड्रिलिंग में एक निरंतर प्रवाह में बीजों को हल रेखा में गिराना और उन्हें मिट्टी से ढंकना शामिल है। यह विधि बहुत ही अच्छी विधि है इस विधि में बीज को निश्चित गेहेराई और निश्चित दुरी तथा सही मात्रा में बीज की बुवाई करने में मदद मिलती है

4)Seed dropping behind the plough(हल के पीछे बीज गिरना)

जैसा की इस विधि के नाम से पता चल रहा है इस विधि में एक आदमी हल के पीछे फर में बीज गिराता है। हल के पीछे बुवाई करना एक उपकरण द्वारा किया जा सकता है जिसे मलोबांस कहा जाता है। इसमें एक बांस की नली होती है, जिसमें एक फनल के आकार का मुंह होता है।
इसमें एक बांस की नली होती है, जिसमें एक फनल के आकार का मुंह होता है। एक आदमी फ़नल के माध्यम से बीज को गिराता है और अन्य आदमी हल और बैल को संभालता है।
यह गांवों में इस्तेमाल की जाने वाली बहुत ही सामान्य विधि है। इसका उपयोग मक्का, चना, मटर, गेहूं और जौ जैसे बीज के लिए किया जाता है। इस विधि में बहुत समय लगता है और बहुत धीमी विधि है

5)Transplanting(रोपाई)

रोपाई में नर्सरी में पौध तैयार करना और फिर तैयार पौधों को खेत में रोपाई करना शामिल है। यह आमतौर पर सब्जी और फूलों के लिए किया जाता है। यह बहुत समय लेने वाला ऑपरेशन है। मिट्टी में पौधों को रखने के उपकरण को ट्रांसप्लांटर कहा जाता है। इसको हम हाथो द्वारा पक्तिबद्ध तरीके से भी लगते है

6)Hill dropping विधि

इस विधि में बीजों को निश्चित अंतराल पर गिराया जाता है न कि एक सतत प्रवाह में। इस प्रकार एक पंक्ति में पौधे से पौधे के बीच का अंतर स्थिर होता है। ड्रिल के विधि में, बीज निरंतर धारा में गिराए जाते हैं और एक पंक्ति में पौधे से पौधे के बीच रिक्ति स्थिर नहीं होती है।
7)Check row planting
यह रोपण की एक विधि है, जिसमें पंक्ति से पंक्ति और पौधे से पौधे की दूरी एक समान है। इस विधि में, बीज सीधे समानांतर हल-रेखा के साथ लगाए जाते हैं। पंक्तियाँ हमेशा दो लंबवत दिशाओं में होती हैं। चेक पंक्ति रोपण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मशीन को चेक रो प्लानर कहा जाता है।

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