Major soils types of India

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मिट्टी को पृथ्वी की सबसे पतली परत के रूप में परिभाषित किया गया है पृथ्वी की crust, चट्टानों, जटिल खनिज यौगिक, कार्बनिक पदार्थ, के विघटन से बनी है पानी / हवा और जीवित जीव जैसे बैक्टीरिया,कवक, कीड़े और केचुए पौधों की वृद्धि के प्राकृतिक माध्यम के रूप में कार्य करते हैं।

मिट्टी पौधों को पोषण, नमी और पौधों की जड़ो को हवा प्रदान करती है भारत के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न मिट्टी समूह पाए जाते हैं। प्रतेक मिट्टी के भौतिक गुण और रसायनिक गुण अलग होते हैं। भौतिक गुण जैसे संरचना, बनावट, रंग, जल धारण क्षमता, गहराई और रसायनिक गुण जैसे pH, EC, CEC, अम्लीय या क्षारीय, आदि। गुण अलग होते हैं।

भारत की प्रमुख मिट्टी (Major soils of India)


1. Alluvial soil(जलोढ़ मिट्टी) (Entisols, Inceptisols and Alfisol)
2. Black soil(Vertisol)( काली मिट्टी)
3. Red soil (Alfisol)(लाल मिट्टी)
4. Laterite soil (Ultisol)(लेटराइट मिट्टी)
5. Desert soil (Aridisol)(रेगिस्तानी मिट्टी)
6. Forest soil and hill soil, peat and marshy soils(वन मिट्टी और पहाड़ी मिट्टी, पीट और दलदली मिट्टी)
7. Problem soils(समस्या मिट्टी)(खारा, क्षार, अम्ल)

1. Alluvial soil(जलोढ़ मिट्टी)

Alluvial soil


यह भारत में पाई जाने वाली सबसे व्यापक मृदा है। भारत के कुल क्षेत्रफल में से, 48.0 million hac नदी Alluvial soil के अंतर्गत आता है।

इन मिट्टियों में डेल्टा जलोढ़(deltaic alluvium), कैल्केरियास जलोढ़(calcareous alluvium) और तटीय जलोढ़(coastal alluvium) शामिल हैं Alluvial soil धाराओं और नदियों में परिवहन द्वारा बनाई जाती है और बाढ़ के मैदानों में या तटीय(coastal) क्षेत्र में जमा होती है।

वे यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात, पंजाब, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु में फैले सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और तामिरापर्णी डेल्टा के घाटियों में पाए जाते हैं।

नई Alluvial soil खादर(Khadar) कहलाती है जो की रेतीली, हल्के रंग तथा कम कंकड़ वाली होती है। पुरानी Alluvial soil भांगर(Bhangar) कहलाती है

जो की पूर्णता चिकनी मिट्टी, गहरे रंग तथा ज्यादा कंकड़ वाली होती ऊंचाई वाली Alluvial soil अम्लीय(acidic) होती तथा समतल वाली सामान्य से छारीय(Alkali) हो सकती हैं तथा समतल जगहों की soil में phosphorus सीमित मात्रा में होता हैं और और potassium अधिक मात्रा में होता है।

Alluvial soil में पोषक तत्व अधिक मात्रा में होते हैं और यह मृदा उपजाऊ भी होती हैं इन मृदाओ में कई प्रकार की फसलें उगाई जा सकती हैं, जैसे गेहूं , चावल रूई, मक्का, दालें आदि

2. Black soil(Vertisol)( काली मिट्टी)

black soil

मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा ज्यादा होने के कारण इसका रंग गहरा भूरा (Dark-grey) होता हैं यह मिट्टी लगभग 32 million हेक्टेयर के क्षेत्र में फैली हुई है। इस मृदा को ब्लैक कॉटन सॉइल (black cotton soil) के नाम से भी जाना जाता है। यह मृदा पानी को बहुत अच्छी तरह ग्रहण(absorbs) करती है और इसमें नमी लंबे समय तक बनी रहती है।

इस मृदा में पानी धारण क्षमता के कारण इस में कपास की खेती बहुत अच्छी तरह से होती है। यह मृदा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दक्षिण उड़ीसा, दक्षिण और तटीय आंध्र प्रदेश, उत्तरी कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में पायी जाता है।

Black soil में चिकनी मिट्टी (clay soil) का (30-40%) भाग होता है, इसलिए, जल धारण क्षमता अधिक होती है। यह मृदा बारीक होती है। इसलिए इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम कार्बोनेट(Calcium and Magnesium carbonates) का उच्च अनुपात होता है

शुष्क होने पर, इसमें 30-45 सेमी से अधिक गहरी दरारें बनजाती है। तमिलनाडु में, काली मिट्टी में Ph की मात्रा 8.5 से 9 तक है और चूने की मात्रा (5-7%) तक होती है

3. Red soil (Alfisol)लाल मिट्टी (अल्फिसोल)

red soil


रंग के आधार पर (फेरिक ऑक्साइड ferric oxide की उपस्थिति के कारण) इसे लाल मिट्टी कहा जाता है। भारत में लगभग 30 million hac में यह पाई जाती हैं। ये ग्रेनाइट और अन्य मेटामॉर्फिक चट्टानों से बनती हैं

अधिकतर ये मृदा अर्ध-शुष्क(semi-arid) क्षेत्रों में पाया जाता है और ये लाल से पीले रंग की होती है। इस मिट्टी की जलधारण छमता( water retention capacity)कम होती है

Red soil गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में मौजूद है, उत्तर और पूर्व में अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से में पाई जाती है

इस मिट्टी में मूंगफली की फसल की खेती के लिए अत्यधिक उपयुक्त है। आम तौर पर बाजरा, दलहन, तिलहन (मूंगफली, तिल, अंडी) और कसावा जैसी कंद की फसलों की खेती की जाती है।

4.Laterite soil (Ultisol)(लेटराइट मिट्टी)

Laterite soil

यह मृदा है ज्यादातर पहाड़ी और तलहटी क्षेत्रों(foothill areas) में पाई जाती हैं। यह मृदा वर्षा के एक उच्च तीव्र बहाव के तहत बनती है यह लाल मिट्टी का एक संशोधित रूप है, और इस मिट्टी में चिकनी मिट्टी (clay soil content) की मात्रा न्यूनतम (minimum) होती है

यह मृदा कार्बनिक पदार्थों से भरपूर है और इस मृदा में जल धारण की क्षमता छमता मध्यम(minimum) है यह मृदा अम्लीय(acidic) होती है इस मृदा में अम्लीय मृदा में उगने बली फसल लगती है

5.Desert soil (Aridisol)(रेगिस्तानी मिट्टी)

Desert soil

यह मिट्टी रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाई जाती है। राजस्थान के रेगिस्तान क्षेत्रों (थार रेगिस्तान), भारत के हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। इसमें Clay content <8% ही होता है इसकी जल धारण क्षमता की क्षमता बहुत ही काम होती है इस मृदा में खजूर, ककड़ी, बाजरा जैसी फसलों की खेती की जाती है (कुछ देश जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, सूडान, आदि पाई में जाती है )

6.Forest soil and hill soil, peat and marshy soils(वन मिट्टी और पहाड़ी मिट्टी, पीट और दलदली मिट्टी)

Forest soil

ये मिट्टी कार्बनिक पदार्थों में बहुत समृद्ध हैं। केरल, पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों, उड़ीसा, दक्षिण और तमिलनाडु के पूर्वी तट में पाया जाता है। वन मिट्टी (Forest soil) अधिकांश फसलों के लिए उपयुक्त नहीं है। बारिश के मौसम में चावल की खेती ज्यादातर तटीय क्षेत्र में की जाती है।

7.Problem soils(समस्या मिट्टी)(खारा, क्षार, अम्ल)

इस मिट्टी में तीन प्रकार की मिट्टियां पाई जाती हैं क्षारीय, अम्लीय और खरी मिट्टी। तथा किसी मृदा के भौतिक और रासायनिक गुणों में परिवर्तन ही Problem soils कहलाता है।

Saline soils(खरी मिट्टी) :- Na और Ca और Mg के क्लोराइड और सल्फेट्स की अधिक मात्रा होने के कारण पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है। जब NaCl की मात्रा बढ़ जाती है तो मिट्टी saline हो जाती है।

Acid soil(अम्लीय मिट्टी):- जिस मृदा का ph 7 से कम हो इस हम acid soil कहते हैं। अधिक acid soil का पी एच 4 से 4.75 तक होता है। मृदा में अम्लीयता तब बढ़ जाती है जब उसके NPK में कोई बदलाव होता है तो मृदा में अम्लीय हो जाती है।

Sodic soil(क्षारीय मिट्टी):- Sodic soil sodium कार्बोनेट और बाइकार्बोनेट की मात्रा अधिक होती है और मृदा में एक्चेंजेबल सोडियम परसेंटेज (exchangeable sodium percentage) का level low हो जाता है।

संछिप्त विवरण(Brief description)

1.जलोढ़ मृदा (Alluvial soil) का निर्माण नदियों द्वारा किया जाता है और यह मृदा पोषक तत्वों से भरपूर और बहुत उपजाऊ होती है। 48.0 million hac नदी जलोढ़ मृदा( Alluvial soil) के अंतर्गत आता है।

2.काली मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा ज्यादा होने के कारण इसका रंग गहरा भूरा (Dark-grey) होता है। यह मृदा पानी को बहुत अच्छी तरह ग्रहण(absorbs) करती है इसलिए इस में कपास की खेती बहुत अच्छी तरह से होती है।

3. लाल मिट्टी अधिकतर ये मृदा अर्ध-शुष्क(semi-arid) क्षेत्रों में पाया जाता है फेरिक ऑक्साइड (ferric oxide) की उपस्थिति के कारण इसे लाल मिट्टी कहा जाता है। इस मिट्टी की जलधारण छमता कम होती है

4.Laterite soil यह मृदा है ज्यादातर पहाड़ी और तलहटी क्षेत्रों(foothill areas) में पाई जाती हैं। यह मृदा कार्बनिक पदार्थों से भरपूर है इस मृदा में जल धारण की क्षमता छमता मध्यम(minimum) है

5.रेगिस्तानी मिट्टी यह रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाई जाती है। इसमें Clay content <8% ही होता है इसकी जल धारण क्षमता की क्षमता बहुत ही काम होती है

6.ये मिट्टी कार्बनिक पदार्थों में बहुत समृद्ध हैं। केरल, पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों, उड़ीसा, दक्षिण और तमिलनाडु के पूर्वी तट में पाया जाता है।

7.इस मिट्टी में तीन प्रकार की मिट्टियां पाई जाती हैं क्षारीय, अम्लीय और खरी मिट्टी, किसी मृदा के भौतिक और रासायनिक गुणों में परिवर्तन ही Problem soils कहलाता है।

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