Irrigation

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फसल उत्पादन के लिए पानी को कृत्रिम रूप से देना ही सिंचाई(Irrigation) कहलाता है।

आज हम आपको कृषि में प्रयोग होने वाले कुछ सिंचाई के तरीकों को बातएंगे

IRRIGATION METHODS

surface Irrigation

(सतही सिंचाई)

surface irrigation


सतही सिंचाई वह सिंचाई है जहाँ पानी को गुरुत्वाकर्षण द्वारा मिट्टी की सतह पर लागू और वितरित किया जाता है सतह सिचाई (surface irrigation) सबसे पुराना और सामन्य तरीका है 90% सिंचाई दुनिया में इसी तरीके से की जाती है USA में 66% सिंचाई को सतह सिचाई से ही की जाती है।यह सिचाई समतल और कम ढलान वाली जमीनों पर की जाती है।

Border Irrigation

(सीमा की सिंचाई)


यह सिंचाई सतही सिंचाई का हिस्सा है इस सिंचाई में भूमि को कई समांतर पतियों में विभाजित किया जाता है। और समांतर पत्तियों में से छोटे-छोटे नलिकाओं को बांट दिया जाता है इस सिचाई से हम पानी की बड़ी मात्रा को खेत में दे सकते हैं यह सचाई उस मिट्टी में अच्छी रहती है। जिसमें मध्यम रिसाव दर (moderate infiltration rate) हो यह सिंचाई बलुई मिट्टी के लिए अच्छी नहीं है। क्योंकि बलुई मिट्टी का रिसाव दर (infiltration rate) अधिक होता हैं

Basin Irrigation Method

(बेसिन सिंचाई विधि)

Basin irrigation method


यह सिंचाई भी सतह सिंचाई के अंतर्गत आती है यह सतह सिंचाई का बहुत सामान तरीका है इस सिंचाई में खेत को छोटे-छोटे चौकोर भागों में बांट दिया जाता है और इनके आस-पास मेढ बना देते जिससे उस भाग में पानी भरा रहे और इन चौकोर भागों को हम basin कहते है एक basin का आकार 10m2 से 25 m2 तक हो सकता है इसका आकार मिट्टी पर निर्भर करता है

Furrow Irrigation

(हल-रेखा सिंचाई विधि)

Furrow irrigation


इस सिंचाई का उपयोग पंक्ति में लगी फसलों के लिए किया जाता है। बल्कि पंक्तियों के बीच नाली बना दी जाती है। जिससे किसान पानी को फसल के बीच बनी नालियों में प्रवाहित करता है। यह सिंचाई मक्का, गन्ना, कपास, तमाखू, फली, आलू , में प्रयोग की जाती है।

Subsurface Irrigation

(उपसतह सिंचाई)

इस सिंचाई में मिट्टी की उपरी सतह से 30 से 75 cm नीचे सिंचाई की जाती कैपिलरी एक्शन के कारण पानी निचली सतह से ऊपरी सतह पर आ जाता है।यह लगभग टपक सिंचाई के जैसा ही है इस सिंचाई में पानी की कम खपत होती है

Modern Irrigation System

Drip Irrigation

(टपक सिंचाई)

Drip irrigation


इस सिंचाई में पानी को बूंद-बूंद कर सीधे पौधों की जड़ों पर लगाया जाता है। यह सिंचाई पानी की कमी और नमक प्रभावित मिट्टी के लिए बहुत उपयुक्त है इस सिंचाई में सतह सिंचाई से 30 से 60% तक पानी की बचत होती है। इस सिंचाई को लगाने के लिए खर्चा अधिक होता हैं

Sprinkler Irrigation

(फव्वारा सिंचाई)

sprinkler irrigation


फव्वारा सिंचाई के द्वारा पानी का हवा में छिड़काव किया जाता है और यह पानी भूमि की सतह पर कृत्रिम वर्षा के रूप में गिरता है। पानी का छिड़काव स्प्रिंकलर द्वारा किया जाता है। इस सिंचाई में वाष्पीकरण द्वारा पानी का बहुत नुकसान होता है। यह सिंचाई हवा के द्वारा प्रभावित होती है।

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